फूलगोभी की नर्सरी में डैम्पिंग-ऑफ रोग से बचाव के वैज्ञानिक व घरेलू उपाय — पूरी जानकारी
फूलगोभी की नर्सरी में डैम्पिंग-ऑफ रोग से बचाव के घरेलू और वैज्ञानिक उपाय जानें। बीज व मिट्टी उपचार और जैविक तरीके आजमाएं।
डैम्पिंग-ऑफ रोग फूलगोभी
7/16/20251 min read
डैम्पिंग-ऑफ रोग क्या है?
• फूलगोभी की नर्सरी में डैम्पिंग-ऑफ एक तेजी से फैलने वाला फफूंदजनित रोग है।
• बीज के अंकुरण से लेकर 15-20 दिन तक की अवस्था में यह रोग सबसे ज्यादा खतरा बनता है।
• समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो पूरी नर्सरी नष्ट हो सकती है।
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डैम्पिंग-ऑफ रोग के मुख्य कारण क्या हैं?
• अत्यधिक नमी: लगातार गीली मिट्टी में फफूंद तेजी से पनपती है।
• जल जमाव: नर्सरी बेड में पानी ठहरने से जड़ों में सड़न शुरू होती है।
• संक्रमित बीज और मिट्टी: बिना उपचारित बीज और संक्रमित मिट्टी से रोग फैलता है।
• घनी बुवाई: हवा का संचार रुकने से रोग का संक्रमण तेजी से बढ़ता है।
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डैम्पिंग-ऑफ से बचने के लिए वैज्ञानिक तरीके (Step-by-Step)
बीज उपचार (Seed Treatment):
• बीज बोने से पहले बीज उपचार करें।
• ट्राइकोडर्मा विरिडे: 5 ग्राम प्रति किलो बीज पर सूखा उपचार करें।
• बाविस्टिन + थायरम: 2-3 ग्राम प्रति किलो बीज मिलाकर उपचार करें।
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मिट्टी का उपचार (Soil Treatment):
• सोलराइजेशन: नर्सरी बेड को 3-4 हफ्ते तक पारदर्शी प्लास्टिक से ढकें।
• फॉर्मलिन 20%: 2.5 लीटर फॉर्मलिन + 50 लीटर पानी प्रति 10 वर्गमीटर में डालें।
• ट्राइकोडर्मा + गोबर खाद: 1 किलो ट्राइकोडर्मा को 50 किलो सड़ी गोबर खाद में मिलाकर नर्सरी बेड में डालें।
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सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management):
• हल्की फुहार से सिंचाई करें।
• पानी का जमाव बिल्कुल न होने दें।
• सुबह या शाम को ही सिंचाई करें।
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घनी बुवाई से बचाव (Spacing Management):
• कतार से कतार दूरी रखें 6-7 सेमी।
• बीज से बीज दूरी रखें 2-3 सेमी।
• घनी बुवाई से हवा का संचार नहीं हो पाता और रोग फैलता है।
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फफूंदनाशक का छिड़काव (Nursery Spray):
• बाविस्टिन / कैप्टान / ट्राइकोडर्मा लिक्विड का उपयोग करें।
• 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर हर 7 दिन में छिड़काव करें।
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जैविक और घरेलू उपाय — रोगमुक्त नर्सरी का देशी तरीका
• नीम खली: 100-150 ग्राम प्रति वर्ग मीटर मिट्टी में मिलाएं।
• गोमूत्र स्प्रे: 1 लीटर गोमूत्र को 10 लीटर पानी में मिलाकर हर 7 दिन में छिड़कें।
• वर्मी वॉश: 5% घोल के रूप में पौधों पर छिड़कें।
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किसान उपयोगी अनुभव — खेत की बात
“मैंने ट्राइकोडर्मा को गोबर खाद में मिलाकर 7 दिन पहले बेड में डाल दिया और बाविस्टिन से बीज उपचार किया — 95% अंकुरण हुआ और कोई डैम्पिंग-ऑफ नहीं हुआ।”
— सुरेश यादव, बक्सर (बिहार)
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डैम्पिंग-ऑफ के प्रमुख लक्षण (Early Signs to Watch For):
• 7-10 दिन: बीज फूटने के तुरंत बाद पौध गलने लगता है।
• 10-20 दिन: तनों के पास पानी जैसा सड़न दिखाई देती है, पौधा मुरझा जाता है।
• अत्यधिक नमी: रोग तेजी से फैलता है और पूरा बेड नष्ट हो सकता है।
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बचाव के लिए जरूरी सुझाव (Do’s & Don’ts):
• सुबह की धूप वाली जगह पर नर्सरी तैयार करें।
• बीज को बोने से पहले गर्म पानी में 10 मिनट भिगोकर संक्रमण मुक्त करें।
• हल्की सिंचाई करें, ज्यादा पानी से बचें।
• बिना सड़ी गोबर की खाद का प्रयोग न करें।
• जल जमाव और भारी मिट्टी वाली जगह नर्सरी न बनाएं।
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निष्कर्ष — सावधानी, जैविक उपाय और वैज्ञानिक तरीका ही बचाव है
• डैम्पिंग-ऑफ रोग से बचने के लिए वैज्ञानिक तरीका, जैविक उपाय और घरेलू सावधानियां जरूरी हैं।
• सही बीज उपचार, मिट्टी उपचार और सिंचाई प्रबंधन से आप इस रोग को पूरी तरह रोक सकते हैं।
• घरेलू जैविक तरीके जैसे नीम खली, गोमूत्र और वर्मी वॉश नर्सरी को सुरक्षित रखते हैं।
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